तेहरान/नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में तनाव अब अपने चरम पर पहुँच गया है। मंगलवार, 24 मार्च 2026 को ईरानी सशस्त्र बलों के शीर्ष कमान ने एक कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वे किसी भी दबाव में झुकने को तैयार नहीं हैं। खातम-अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही अलीबादी ने सेना के अडिग रहने और अंतिम लक्ष्य प्राप्ति तक संघर्ष जारी रखने की कसम खाई है।
ट्रंप के 'प्रोडक्टिव टॉक' के दावे पर ईरान का पलटवार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान के साथ उनकी सार्थक बातचीत चल रही है, लेकिन ईरानी नेतृत्व ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि उनकी बातचीत केवल क्षेत्रीय देशों के साथ हो रही है और अमेरिका के साथ कोई प्रत्यक्ष वार्ता नहीं हुई है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कलिबफ ने ट्रंप के दावे को "फर्जी खबर" करार देते हुए आरोप लगाया कि ऐसी खबरों का इस्तेमाल वैश्विक तेल और वित्तीय बाजारों में हेरफेर करने के लिए किया जा रहा है।
इजराइल की आक्रामकता: "युद्धविराम हो या न हो, हमले जारी रहेंगे"
ईरान के कड़े रुख के बीच इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भले ही युद्धविराम की बात करे, लेकिन इजराइल ईरान और लेबनान पर अपने सैन्य अभियान जारी रखेगा। आने वाले दिनों में और हमले होने की चेतावनी के साथ इजराइली वायुसेना ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी हिस्सों पर भीषण बमबारी की है, जिसमें हताहतों की खबर है।
क्षेत्रीय प्रभाव: मिसाइल और ड्रोन हमलों से खाड़ी देशों में अलर्ट
जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों की ओर मिसाइल व ड्रोन हमले जारी रखे हैं। सऊदी अरब ने 19 ईरानी ड्रोन मार गिराने का दावा किया है, जबकि कुवैत में हवाई रक्षा प्रणाली के छर्रों से बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त होने के कारण कई घंटों तक बिजली गुल रही। बहरीन में भी मिसाइल अलर्ट के सायरन बजने से तनाव की स्थिति बनी हुई है।
'पूर्ण विजय' का सस्पेंस और भविष्य की रणनीति
मेजर जनरल अलीबादी ने 'पूर्ण विजय' की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी है, लेकिन कूटनीतिक जानकार इसे अमेरिका को दी गई एक सीधी चेतावनी मान रहे हैं। इसका अर्थ यह निकाला जा रहा है कि ईरान किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में कोई बड़ी रियायत देने के मूड में नहीं है और वे किसी भी सैन्य दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। यह रुख दर्शाता है कि क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के कूटनीतिक प्रयास फिलहाल बेहद चुनौतीपूर्ण दौर में हैं।