Hormuz Crisis: पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 'इमर्जेंसी' कॉल; होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने पर बनी सहमति, ईरान में नेतृत्व संकट गहराया
पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर गहन चर्चा की है। दोनों नेताओं ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' की सुरक्षा और उसे खुला रखने पर जोर दिया।
मिडिल ईस्ट पर आज पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर बात हुई. बातचीत में पीएम मोदी ने कहा कि भारत तनाव कम करने का समर्थन करता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला रहना चाहिये.
पीएम मोदी का मिडिल ईस्ट पर मध्यस्थ के रूप में स्वागत करते हैं: अमेरिका
अमेरिकी राजदूत गोर ने कहा कि अमेरिका मिडिल ईस्ट संकट में मध्यस्थ के रूप में पीएम मोदी की भूमिका का स्वागत करता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी-अभी पीएम मोदी से फोन पर बात की. दोनों नेताओं के बीच मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा हुई. इसके अलावा दोनों के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाने के लिए भी बातचीत हुई है.
नई दिल्ली: मंगलवार, 24 मार्च 2026 को वैश्विक राजनीति के दो सबसे शक्तिशाली नेताओं के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए भीषण हमलों के बाद उपजे तनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को सुरक्षित बनाने के लिए साझा रणनीति पर मंथन किया। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस हाई-प्रोफाइल कॉल की पुष्टि की है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा पर खतरा
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक धमनियों में से एक है और युद्ध के कारण इस मार्ग के बाधित होने की आशंका ने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है। यदि यह रास्ता बंद होता है तो वैश्विक तेल और गैस की कीमतें आसमान छू सकती हैं जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं चरमरा सकती हैं। पीएम मोदी ने संसद के दोनों सदनों में स्पष्ट कर दिया है कि कमर्शियल जहाजों और निर्दोष नागरिकों पर होने वाले हमलों को भारत कतई बर्दाश्त नहीं करेगा और अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए इस मार्ग को हर हाल में सुलभ देखना चाहता है।
Received a call from President Trump and had a useful exchange of views on the situation in West Asia. India supports de-escalation and restoration of peace at the earliest. Ensuring that the Strait of Hormuz remains open, secure and accessible is essential for the whole world.…
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Chat on WhatsApp— Narendra Modi (@narendramodi) March 24, 2026
ईरान में नेतृत्व का संकट और युद्ध के भीषण रणनीतिक परिणाम
28 फरवरी 2026 को ईरान पर हुए हमलों ने वहां के सैन्य और राजनीतिक ढांचे को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है। रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और कई कद्दावर नेताओं की मौत हो गई है जिससे वहां नेतृत्व का एक बड़ा संकट गहरा गया है। सत्ता की इस शून्यता ने ईरान को कूटनीतिक रूप से बैकफुट पर धकेल दिया है। ट्रंप और मोदी की यह ताजा बातचीत इस बात का संकेत है कि अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्ध विराम की शर्तों और भविष्य की स्थिरता पर विचार कर रहा है।
भारत की संतुलित विदेश नीति और सक्रिय कूटनीति
भारत इस युद्ध में न केवल अमेरिका बल्कि ईरान के साथ भी निरंतर सक्रिय कूटनीति कर रहा है। पीएम मोदी ने इससे पहले ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान से संवाद किया था जिसके फलस्वरूप कुछ भारतीय तेल टैंकरों को होर्मुज के रास्ते सुरक्षित निकलने की अनुमति मिल सकी। भारत का मुख्य उद्देश्य अपने शिपिंग रूट और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना है। मोदी ने सोशल मीडिया पर संदेश दिया कि भारत हमेशा से तनाव कम करने और जल्द शांति बहाली का पक्षधर रहा है और दोनों देश इस मुद्दे पर निरंतर संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं।
निष्कर्ष: क्या अब थमेगी पश्चिम एशिया की जंग?
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हाल ही में दिए गए सख्त अल्टीमेटम और अब पीएम मोदी के साथ इस समन्वय के बाद यह उम्मीद जगी है कि आने वाले दिनों में मध्य-पूर्व में सैन्य गतिविधियां कम हो सकती हैं। भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के जरिए न केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रहा है बल्कि वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित करने में भी 'पीसमेकर' की भूमिका निभा रहा है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह कूटनीतिक पहल एक स्थायी शांति समझौते की राह खोलेगी।